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पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: कड़ी सुरक्षा के बीच तेज हुआ सियासी घमासान, रैलियों में उमड़ी भीड़

कड़ी सुरक्षा के साये में चुनावी संग्राम, 96 घंटे शराब बैन पर सियासी बवाल और रैलियों में उमड़ती भीड़ से गरमाया माहौल

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। चुनाव आयोग द्वारा निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए राज्यभर में कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है, वहीं पुलिस भी लगातार फ्लैग मार्च कर रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। चुनाव से पहले राज्य में कई जगहों पर धारा 144 लागू की गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
इस बार चुनाव से पहले 96 घंटे के शराब बैन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह फैसला राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इससे आम लोगों को असुविधा हो रही है। वहीं, चुनाव आयोग और प्रशासन का कहना है कि यह कदम निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या वोटरों को प्रभावित करने की कोशिशों पर रोक लगाई जा सके। इस मुद्दे को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है और नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
चुनावी रैलियों में भी भारी भीड़ देखने को मिल रही है। तृणमूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन—तीनों ही अपने-अपने तरीके से मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार जनसभाएं कर रही हैं और अपनी सरकार की योजनाओं को जनता के सामने रख रही हैं। दूसरी ओर, भाजपा भी केंद्र सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए राज्य में सत्ता परिवर्तन का दावा कर रही है। कांग्रेस और वाम दल भी कुछ सीटों पर मजबूत चुनौती पेश करने की कोशिश में जुटे हैं।
इस चुनाव में कई अहम मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं। रोजगार, उद्योग, महिला योजनाएं, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर राजनीतिक दल आमने-सामने हैं। खासकर महिला वोटर्स को लेकर सभी दल विशेष रणनीति बना रहे हैं। तृणमूल सरकार की ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं को लेकर जहां समर्थन दिख रहा है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहा है। इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव भी चुनावी बहस का बड़ा हिस्सा बन चुका है।
चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। फेक न्यूज़ और भड़काऊ पोस्ट पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही, मतदान के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा या गड़बड़ी को रोकने के लिए विशेष कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं।
पश्चिम बंगाल में हर चुनाव को लेकर तनाव और राजनीतिक टकराव की स्थिति देखने को मिलती है, और इस बार भी हालात अलग नहीं हैं। हालांकि, प्रशासन और चुनाव आयोग का दावा है कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है और मतदाता बिना किसी डर के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। अब सभी की नजरें मतदान के दिन और उसके नतीजों पर टिकी हुई हैं, जो राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

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